चाँद और फिजा की कहानी में रोज़ नए मोड़ आ रहे हैं. कभी फिजां के मोबाइल में ३ साल से सेव msg सामने आते हैं तो कभी चाँद टी वी पर आकर कहते हैं की वो फिजां का सम्मान करते हैं. सच क्या है कोई नही जानता. शायद जान भी न पाए. लेकिन जो कुछ भी हो रहा है उसकी उमीद तो पहले दिन से ही थी. जिस दिन ये जोड़ा ज़माने की नज़रों से गायब होकर धर्म और अपना नाम बदल कर ज़माने के सामने एक नए रिश्ते के साथ आया था उसी दिन से इस बात के कयास लगने शुरू हो गये थे की ये रिश्ता कितने दिन, हफ्ते या महीने चलेगा. किसी को भी इसका अंदाजा नही था हाँ, सभी इस बात पर एकमत ज़रूर थे की रिश्ता सालों तक तो नही चलने वाला. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह दोनों ही प्रेमियों का भूतकाल था और कहते भी हैं की कई बार भूतकाल काफी डरावना बनकर इन्सान के सामने आ जाता है. इस कहानी में भी वही हो रहा है.
चाँद मोहम्मद उर्फ़ चन्द्र मोहन का फिजां यानि अनुराधा बाली से रिश्ता कोई ३ साल पुराना है. हालाँकि पहले से ही सभी को इस रिश्ते के बारे में पता था लेकिन कोई इस बारे में बोलने की हिम्मत नही कर सकता था आख़िर हिम्मत करता भी कैसे मामला हरियाणा के उप मुख्यमंत्री से जुडा था और किसी के पास कोई सुबूत भी नही था. अब सुबूत भी है और बात करने के लिए बहाना भी है. सुबूत के तौर पर फिजा के पास ढेर सरे msg हैं और साथ ही अब तक का सारा घटनाकर्म जिसमे दोनों के प्यार शादी और हो चुके या होने जा रहे अलगाव तक की बातें शामिल हैं. फिजां हालाँकि अपने पुराने बयाँ पर कायम हैं लेकिन चाँद मोहम्मद अब पुरी तरह राजनेता के रूप में आ चौके हैं. मुझे याद है जब दोनों शादी करके मोहाली वापिस लौटे थे तो मीडिया से मुखातिब होते ही चाँद ने कहा था की उन्हें फिजा के सिवा किसी की चिंता नही, वो जन्मजात सी एम् हैं ( उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा था की उनके पहले नाम और अब के नए नाम दोनों में CM आता है. चन्द्र मोहन में भी CM और चाँद मोहम्मद में भी CM) , वो फिजा से बहुत प्यार करते हैं और जब उनसे पूछा गया था की क्या उन्हें अपने बच्चों की यद् नही आती तो उनका जवाब था की उन्हें फिजा के अलावा किसी की भी याद नही आती फिजा ही उनका प्यार, जिंदगी और भविष्य है और इनके लिए वो कुछ भी कर सकते हैं. अब उनके बयाँ है की वो सीमा (अपनी बीवी ) और बच्चों से बहुत प्यार करते हैं और फिजा का सम्मान भी करते हैं.
बयानों के दौर के बीच अब चाँद मोहमद या हो सकता है चन्द्र मोहन, चुप हैं. कहाँ है किसी को नही पता. इंतज़ार है उनके लौटने का . देखो जनाब कब आते हैं और कौन सी नई कहानी लेके सामने आते हैं. सबको इंतज़ार है सबसे ज्यादा फिजा को... उसमे गुस्सा कितना है ये जघजिर है. अब तो चाँद को भगवन माफ़ कीजिये अल्लाह ही बचाए...
Friday, February 13, 2009
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Aditya ji
ReplyDeleteApne bohut thik kaha sach likhne-kehne-sunane ki himant bohat kam logo mein hoti hey.jitna dosh chan ka hey , utna fiza ka bhi hey.
surinder singh